Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.

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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 5 ISSUE.: 8(August 2026)

अरावली का पर्यावरणीय संकट: एक संक्षिप्त विश्लेषण


Author(s): डॉ. जगना राम सुडा


Abstract:

अरावली पर्वत श्रृंखला विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वत प्रणालियों में से एक है, जो उत्तर-पश्चिम भारत के पारिस्थितिक तंत्र के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करती है। यह शोध पत्र अरावली क्षेत्र में गहराते पर्यावरणीय संकट का एक संक्षिप्त और मौलिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। पिछले कुछ दशकों में अनियंत्रित शहरीकरण, तीव्र वनों की कटाई और बड़े पैमाने पर हुए अवैध खनन ने इस नाजुक पारिस्थितिकी को अपूरणीय क्षति पहुँचाई है। प्रस्तुत अध्ययन उपग्रह डेटा, हालिया न्यायिक निर्णयों और विभिन्न पर्यावरण समितियों की रिपोर्टों के आधार पर अरावली के क्षरण, मरुस्थलीकरण के बढ़ते खतरे, भूजल स्तर में गिरावट और स्थानीय जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की पड़ताल करता है। शोध में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि यदि इस अनियंत्रित क्षरण को रोकने के लिए नीतिगत और तकनीकी स्तर पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो पूरे उत्तर भारत को एक गंभीर जलवायु और जल संकट का सामना करना पड़ेगा।

keywords:
अरावली पर्वतमाला, पर्यावरणीय संकट, अवैध खनन, मरुस्थलीकरण, जैव विविधता, अरावली ग्रीन वॉल, पारिस्थितिक संतुलन।

Pages: 20-21     |    11 View     |    3 Download

How to Cite this Article:

डॉ. जगना राम सुडा. अरावली का पर्यावरणीय संकट: एक संक्षिप्त विश्लेषण. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2026; 5(8):20-21,