Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.

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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 5 ISSUE.: 6(June 2026)

भारतीय राजनीतिक चिन्तन में जयप्रकाश नारायण की भूमिकाः एक अध्ययन


Author(s): पूजा नायक


Abstract:

स्वतंत्रता पूर्व तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत की राजनीति में जयप्रकाश नारायण एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। बचपन से नैतिकता के प्रति झुकाव गांधीवादी आदर्शों से प्रेरित, युवावस्था में कार्ल माक्र्स के समाजवाद से प्रभावित होकर अपने चिंतन का आधार माक्र्सवादी समाजवाद बनाने को सोचा, लेकिन स्टालिन के समाजवाद के आवरण में किये जा रहे गैर-समानता, अत्याचार, अन्याय ने उन्हें लोकतांत्रिक समाजवाद की ओर मोड़ दिया। जयप्रकाश नारायण के चिंतन का मूल आधार- लोकतांत्रिक- समाजवाद, दलविहीन लोकतंत्र, सर्वोदय, राष्ट्रवाद, समग्र क्रांति, सत्ता का विकेन्द्रीकरण, परोक्ष चुनाव पद्धति, सामाजिक-आर्थिक न्याय था। भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार एवं नीति निदेशक तत्वों में राज्य के नागरिकों को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय के महत्वपूर्ण उपबंध हैं किन्तु आज भी अमीर-अमीर होता जा रहा है तथा गरीब-गरीबी रेखा से ऊपर उठता ही नहीं। ऐसी स्थिति जयप्रकाश नारायण के चिंतन की प्रासंगिकता भारतीय राजनीति में बनी रहेगी।

keywords:
संविधान, लोकतांत्रिक, समाजवाद, दल विहीन लोकतंत्र, सर्वोदय, राष्ट्रवाद, समग्र कांति, सत्ता का विकेन्द्रीकरण, सप्तक्रांति, स्वतंत्रता संग्राम आदि।

Pages: 85-87     |    19 View     |    1 Download

How to Cite this Article:

पूजा नायक. भारतीय राजनीतिक चिन्तन में जयप्रकाश नारायण की भूमिकाः एक अध्ययन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2026; 5(6):85-87,