Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 5 ISSUE.: 1(January 2026)
Author(s): सत्य नरायन यादव और डॉ. पी.एस. त्यागी
Abstract:
श्रीमद्भगवद्गीता के भक्ति-योग के शैक्षिक निहितार्थों और धारण प्रक्रिया पर आधारित यह शोध पत्र आधुनिक शिक्षा की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करता है। वर्तमान डिजिटल युग में जहाँ सूचनाओं की प्रचुरता ने छात्रों की एकाग्रता को कम किया है, वहाँ गीता का भक्ति-योग ज्ञान को अंतर्मन में स्थापित करने की तकनीक सिखाता है। शोध का मुख्य केंद्र अध्याय 12 के वे सूत्र हैं जो मानवीय मेधा को अनुशासित करते हैं। 'अभ्यासयोगेन ततो मामिच्छाप्तुं धनञ्जय' (12.9) के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि विस्मृति के विरुद्ध निरंतर पुनरावृत्ति ही अमोघ अस्त्र है।
धारण प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए शैक्षिक प्रक्रिया में भक्ति-योग का मनोवैज्ञानिक पक्ष अत्यंत प्रभावी है। स्मरण शक्ति तभी बढ़ती है जब सूचना को 'श्रद्धा' और 'संवेगों' के साथ जोड़ा जाए। 'मय्यर्पितमनोबुद्धि' (12.14) की अवस्था संज्ञानात्मक भार (Cognitive Load) को कम कर 'हिप्पोकैम्पस' को सक्रिय करती है, जिससे न्यूरल पाथवे गहरे बनते हैं और कठिन अवधारणाएं भी स्थायी विवेक का हिस्सा बन जाती हैं। इस प्रक्रिया में 'स्थितप्रज्ञ' की अवस्था छात्र को मानसिक उद्वेगों और बाहरी विक्षेपों के बीच भी लक्ष्य पर स्थिर रखती है, जिससे सीखी गई सामग्री विस्मृति के गर्त में नहीं जाती। यह दृष्टिकोण राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के मूल लक्ष्यों के साथ पूर्णतः संरेखित है, जो रटंत प्रणाली के स्थान पर 'अनुभवात्मक अधिगम' और भारतीय ज्ञान परंपरा पर बल देती है। भक्ति-योग के 'समत्व' (12.18) और 'मौन' चिंतन (12.19) जैसे गुण छात्र को अंतर्मुखी होकर ज्ञान के विश्लेषण की शक्ति देते हैं। अंततः, यह शोध सिद्ध करता है कि भक्ति-योग आधारित गुरु-शिष्य संबंध और श्रद्धापूर्ण शिक्षण विधि वर्तमान शिक्षा के यांत्रिक स्वरूप को जीवंत बनाती है। यह न केवल बौद्धिक क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि छात्र को एक संतुलित, प्रज्ञावान और स्थितप्रज्ञ नागरिक के रूप में गढ़ता है, जो आज के अस्थिर समय की महती आवश्यकता है I
keywords:
श्रीमद्भगवद्गीता, भक्ति-योग, धारण प्रक्रिया, शैक्षिक निहितार्थ, वर्तमान प्रासंगिकता I
Pages: 155-159 | 28 View | 3 Download
How to Cite this Article:
सत्य नरायन यादव और डॉ. पी.एस. त्यागी. श्रीमद्भगवद्गीताधारित भक्ति-योग के शैक्षिक निहितार्थों की धारण प्रक्रिया के संदर्भ में वर्तमान प्रासंगिकता. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2026; 5(1):155-159,