Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
Mail: allstudy.paper@gmail.com
Contact: +91-9650866419
Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 5 ISSUE.: 1(January 2026)
Author(s): डॉ. रेनू शुक्ला एवं हरीश
Abstract:
शिव पुराण, हिंदू धर्म के प्रमुख पुराणों में से एक, शिव की दिव्य प्रकृति, उनके गुणों और दर्शनिक सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन करता है। इस शोध पत्र में, हम ’शिव तत्व’ जो शिव की मूल अवधारणा, उनके सृष्टिकर्ता, संरक्षक और विनाशक रूप, तांत्रिक पहलुओं और आध्यात्मिक महत्व को संदर्भित करता है का गहन विश्लेषण करते हैं। शिव पुराण भारतीय धार्मिक एवं दार्शनिक परम्परा का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण ग्रन्थ है, जिसमें भगवान शिव को परम ब्रह्म, परम तत्त्व तथा सम्पूर्ण सृष्टि का आधार बताया गया है। शिव को सगुण और निर्गुण, साकार और निराकार दोनों रूपों में स्वीकार किया गया है। यह शोध-पत्र शिव पुराण में प्रतिपादित शिव तत्त्व का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है, जिसमें शिव के दार्शनिक, आध्यात्मिक, नैतिक तथा सामाजिक आयामों का विस्तार से विवेचन किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि शिव तत्त्व केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का व्यापक आधार है, जो मानव को आत्मज्ञान, संतुलन और मोक्ष की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है। शिव पुराण के विभिन्न अध्यायों, जैसे कि रुद्र संहिता, कुमारिका खंड और शतरुद्र संहिता, से उद्धरणों और व्याख्याओं के आधार पर, हम शिव तत्व की बहुआयामी प्रकृति पर चर्चा करते हैं। यह अध्ययन ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, दर्शनिक विश्लेषण और आधुनिक व्याख्याओं पर आधारित है, जिसमें शिव तत्व की प्रासंगिकता को उजागर किया गया है। अंत में, हम सुझाव देते हैं कि कैसे यह तत्व आधुनिक जीवन में प्रेरणा प्रदान कर सकता है।
keywords:
Pages: 139-141 | 23 View | 2 Download
How to Cite this Article:
डॉ. रेनू शुक्ला एवं हरीश. शिव पुराण में शिव तत्व का अध्ययन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2026; 5(1):139-141,