Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 4 ISSUE.: 9(September 2025)
Author(s): नरेश कुमार
Abstract:
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहाँ लोकतंत्र की आधारशिला न केवल संसद या विधानसभाओं तक सीमित है, बल्कि यह ग्राम पंचायत और नगर निकाय से जुडी हुई है। महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की संकल्पना की थी, कि सत्ता का विकेंद्रीकरण हो और प्रत्येक नागरिक राजनैतिक निर्णय प्रक्रिया का भागीदार बने। इसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 40 राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में किया गया था। 1992 में 73वें और 74वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों को संवैधानिक दर्जा देकर भारत ने विकेंद्रीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया। जिससे स्थानीय निकाय स्वतंत्र रूप से अपने क्षेत्र के विकास और प्रशासन का संचालन कर सकें। परन्तु वास्तविकता यह है कि समय के साथ राजनीतिक दलों का प्रभाव इन स्थानीय संस्थाओं पर बढ़ने लगा है। अब अधिकांश राज्यों में पंचायत और नगर निकाय चुनाव दलीय राजनीति के आधार पर कराए जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय निकायों की संवैधानिक स्थिति कमजोर हुई है और वे राजनीतिक दलों के दबाव में कार्य करने लगे हैं। जिससे उनकी स्वायतता ख़त्म हो रही है।
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Pages: 49-51 | 2 View | 0 Download
How to Cite this Article:
नरेश कुमार. राजनीतिक दलों के बढ़ते हस्तक्षेप से स्थानीय निकायों की स्वायत्तता पर प्रभाव. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(9):49-51,