Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.

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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 4 ISSUE.: 6(June 2025)

पश्चिम निमाड़ में जनजातिय समाज की परम्पराओं का एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण


Author(s): डॉ. राखी कौशल


Abstract:

देश का शायद ही ऐसा कोई प्रदेश होगा जिसमें मध्यप्रदेश की तरह 46 आदिम जातियां और 9 विशेष पिछड़ी जनजातियां निवास करती हों। प्रदेश की कुल आबादी में भी उनका लगभग एक चैथाई हिस्सा है। आबादी के इस बड़े हिस्से को उनके शैक्षणिक और आर्थिक विकास की मुख्य धारा में लाना एक चुनौतीपूर्ण दायित्व है। आजादी के बाद परिदृश्य बदला भारत के संविधान में व्यक्त सामाजिक न्याय के संकल्प ने अनुसूचित जनजातियों को ‘समता के अधिकार‘ से सम्पन्न करते हुए उनकी प्रगति के रास्ते खोल दिये है। इनसायक्लोपिडिया शब्दकोश के अनुसार इस अंग्रेज़ी शब्द ‘ट्राईब के पांच अलग-अलग अर्थ हैं, जो निम्न हैं:- इनकी प्रमुख पहचान के अंतर्गत आदिवासियों के समूहों का बर्बर कबीले के रूप में होना। यह शब्द रोमन इतिहास से संबंधित है अर्थात रोमंस के कबीले जिनको जनजाति शब्द के रूप में जाना जाता है। यह शब्द समान विभाजन को दर्शाता है, जो या तो प्राकृतिक या राजनैतिक हो। यह वर्गीकरण की एक इकाई से संबंधित है। यह शब्द बड़ी (ज्यादा) संख्या के लिए उपयोग किया जाता है। अर्थव्यवस्था के आधार पर ही समाज में आर्थिक गतिविधियों का संचालन होता हैं। जनजातियों का अपना समाज होता हैं। उनकी अपनी संस्कृति तथा ijEijk, होती हैं। इस संस्कृति तथा परम्परा के आधार पर उनकी अर्थव्यवस्था होती हैं। समाज की जैसी आर्थिक व्यवस्था होगी, उसी के आधार पर समाज की संस्कृति तथा परम्परा का निर्माण तथा विकास होगा।

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How to Cite this Article:

डॉ. राखी कौशल. पश्चिम निमाड़ में जनजातिय समाज की परम्पराओं का एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(6):18-20,