Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 4 ISSUE.: 3(March 2025)
Author(s): डॉ. अवनीश कुमार सिंह
Abstract:
अपवाह विश्लेषण जलीय अपवाह बेसिन की आकारमितिक अध्ययन हेतु एक प्रमुख विधि है। अपवाह बेसिन का तात्पर्य उस स्थलीय क्षेत्र से है जो किसी मुख्य सरिता या उसकी सहायक सरिताओं को जल प्रदान करती है। अपवाह विश्लेषण के अंतर्गत अपवाह आवृत्ति,अपवाह घनत्व एवं अपवाह प्रतिरूप का अध्ययन किया जाता है जिसके द्वारा क्षेत्र की भवाकृतिक विभिन्नताओं का ज्ञान होता है। अपवाह आवृत्ति एवं अपवाह घनत्व के विश्लेषण के लिए संपूर्ण अध्ययन क्षेत्र को एक वर्ग किलोमीटर के ग्रिड में विभक्त कर प्रत्येक ग्रिड वर्ग के सरिताओं की संख्या की गणना की गई है तथा सरिताओं की संख्या में क्षेत्रफल से भाग दे कर अपवाह आवृत्ति का परिकलन किया गया है। अध्ययन क्षेत्र में अपवाह आवृत्ति वितरण का 41.68 प्रतिशत मध्यम तथा मध्यम उच्च, 53.41 प्रतिशत उच्च एवं अति उच्च तथा 4.91प्रतिशत निम्न अपवाह आवृत्ति वर्ग में स्थित है। किसी अपवाह बेसिन की सरिताओं की लम्बाई सभी श्रेणियों की सरिताओं की लम्बाई के योग से परिकलित किया जाता है एवं इस योग को उसे प्रवाह के सम्पूर्ण क्षेत्रफल से भाग देकर अपवाह घनत्व का परिकलन किया जाता है। अध्ययन क्षेत्र के 43.18 प्रतिशत भू भाग पर मध्यम एवं मध्यम सघन अपवाह घनत्व, 44.06 प्रतिशत भू भाग पर सघन एवं अति सघन अपवाह घनत्व विस्तृत है जबकि अति सूक्ष्म, मध्यम सूक्ष्म एवं सूक्ष्म अपवाह घनत्व 12.75 प्रतिशत भू भाग पर अवस्थित है। उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि अध्ययन क्षेत्र में भौमिकीय संरचना, विवर्तनिकी,शैलकी एवं जलवायु का विशेष प्रभाव है। जिसे अध्ययन क्षेत्र के अपवाह आवृत्ति एवं अपवाह घनत्व के क्षेत्रीय वितरण में देखा जा सकता है ।
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How to Cite this Article:
डॉ. अवनीश कुमार सिंह. सोलन जनपद हिमांचल प्रदेश का अपवाह विश्लेषण. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(3):08-13,