Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.

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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 4 ISSUE.: 12(December 2025)

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की दृष्टि में महिला सशक्तिकरण: एक समीक्षात्मक अध्ययन


Author(s): डॉ. लता धुपकरिया


Abstract:

अंबेडकर जिनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व सामानता एवं न्याय का यथार्थ प्रतीक है, समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं अन्याय के प्रति चिंता एव चिंतन उनके जीवन का अभिन्न अंग रही है, इसी चिंतन में जहां समाज का हर कमजोर वर्ग शामिल है जिसमें महिलाओं के प्रति चिंतन भी विशेष स्थान रखता है, अंबेडकर ना केवल महिला शिक्षा एवं अधिकारों की बात करते हैं बल्कि संविधान के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाने का प्रयास भी करते हैं क्योंकि ऐसे अधिकारों का कोई मूल्य नहीं जिन्हें कानूनी रूप ना दिया जाए अंबेडकर ऐसे समय में महिलाओं के सशक्तिकरण शिक्षा एवं अधिकारों की बात करते हैं जीस समय ऐसे मुद्दों पर विचार करना ही एक स्वप्न मात्र प्रतीत होता था, अर्थात महिलाओं के सशक्तिकरण का विचारअंबेडकर के मस्तिष्क में जन्म लेता हैऔर संविधान में स्थान प्राप्त कर यथार्थ रूप धारण करता है भारतीय संविधान के अंतर्गत महिलाओं के अधिकारों से संबंधित कई ऐसे प्रावधान रखें गए हैं जो उन्हें सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से सशक्त बनातै हैं निश्चित ही जबकि आज भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में एक सशक्त व्यक्तित्व के रूप में उभर रही हैं जिसका श्रेय संविधान निर्माता के रूप में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को ही जाता है, जिन्होंने महिलाओं के ऐसे संवेदनशील पहलुओं पर ध्यान आकर्षित किया है जो अब तक किसी के विचार में भी शामिल नहीं थे।

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Pages: 180-182     |    2 View     |    0 Download

How to Cite this Article:

डॉ. लता धुपकरिया. डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की दृष्टि में महिला सशक्तिकरण: एक समीक्षात्मक अध्ययन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(12):180-182,