Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 4 ISSUE.: 12(December 2025)
Author(s): डॉ. यशवंत सिंह एंव डॉ. प्रमोद कुमार राजपूत
Abstract:
भारतीय ज्ञान परम्परा में निहित नैतिक‑धार्मिक सिद्धांतों को आधुनिक शैक्षिक संदर्भ में पुनःस्थापित करने की आवश्यकता को समझते हुए, इस शोध में केवल गुणात्मक (qualitative) विधि अपनाई गई है। अध्ययन के मुख्य उद्देश्य हैं: (1) भारतीय ज्ञान परम्परा के ऐतिहासिक‑दर्शनिक स्वरूप का विश्लेषण, (2) प्राचीन ग्रंथों एवं शिक्षा‑पद्धतियों में चरित्र‑निर्माण के तत्वों की पहचान, (3) वर्तमान शैक्षिक एवं सामाजिक संदर्भ में इन तत्वों की प्रासंगिकता का मूल्यांकन, तथा (4) चरित्र‑निर्माण की चुनौतियों के समाधान में भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल सिद्धांतों की भूमिका को स्पष्ट करना। डेटा संग्रह में 12 विद्यालयों के 24 शिक्षकों के गहन साक्षात्कार, 6 फोकस‑ग्रुप चर्चा, तथा प्रमुख ग्रंथों (वेद, उपनिषद, मनुस्मृति, शास्त्र) का पाठ्य‑विश्लेषण शामिल है। थीमैटिक विश्लेषण के माध्यम से पाँच प्रमुख थीम उभरे: धर्म‑आधारित नैतिकता, आत्म‑संयम, सेवा‑भावना, सत्य‑परायणता, और सामाजिक सामंजस्य। परिणाम दर्शाते हैं कि भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल सिद्धांत वर्तमान चरित्र‑निर्माण प्रक्रिया में गहन प्रेरणा स्रोत हैं, परन्तु शिक्षकों की प्रशिक्षण एवं पाठ्यक्रम में एकीकरण की कमी प्रमुख बाधा है।
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Pages: 169-171 | 2 View | 0 Download
How to Cite this Article:
डॉ. यशवंत सिंह एंव डॉ. प्रमोद कुमार राजपूत. चरित्र निर्माण में भारतीय ज्ञान परम्परा की भूमिका. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(12):169-171,