Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 4 ISSUE.: 1(January 2025)
Author(s): रवि कुमार मीना
Abstract:
मनुष्य जाति का आदि ग्रंथ के रूप में वेदों को जाना जाता है। वेद शब्द का अर्थ ज्ञान या जानना होता है। वैदिक साहित्य में पर्यावरण व प्रकृति का संबंध ऋचाओं के माध्यम से बताया गया है ऋग्वेद में पर्यावरण से संबंधित अनेक सूक्तों की व्याख्या की गई है। अथर्ववेद में भूमि की क्रियाशीलता व विशिष्टता का वर्णन किया गया। आज का युग अर्थात् वैज्ञानिक युग प्रकृर्ति के रहस्य को बहुत बाद में जान पाया जबकि वैदिक साहित्य में उस रहस्य को पूर्व में ही बतलाया गया है। वैदिक साहित्य में प्रकृर्ति के साथ संबंध स्थापित करने की सीख दी गई है। वेदों मैं बतलाया गया है कि प्रकृर्ति के साथ संबंध नहीं स्थापित करने पर उसका दुष्परिणाम संपूर्ण मानव जाति के लिए हानिकारक हो सकता है। वेदों में प्रकृति के प्रति गहन श्रद्धा भाव और समर्पण भाव के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान की गई है। वेद पर्यावरण के प्रतीक चिन्ह के रूप में कार्य करते हैं।
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How to Cite this Article:
रवि कुमार मीना. वैदिक साहित्य पर्यावरण के विशेष संदर्भ में. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(1):18-20,