Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.

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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 4 ISSUE.: 1(January 2025)

रवीन्द्र कालिया के उपन्यासों में नारी चेतना का विश्लेषणात्मक अध्ययन


Author(s): डॉ. प्रभु दयाल शर्मा


Abstract:

ममता कालिया के उपन्यास आधुनिक भावबोध को उजागर करते हुए नारी चेतना पर विशेष केंद्रित रहे हैं। इनके उपन्यास नारी चेतना के प्रति सजगता के भाव पैदा करते हैं। समाज के प्रति समर्पित भाव से कार्य करते हुए कालिया जी ने स्त्री चेतना के हर पहलू को उजागर किया है। रवीन्द्र कालिया नारी जीवन की प्रेरणा हैं। उनके उपन्यासों में नारी चेतना में बहुचर्चित कथाकार रवीन्द्र कालिया का लेखन विशेष रूप से भारतीय स्त्री के परिवेश के चतुर्दिक घूमता है। रवीन्द्र कालिया स्त्री की समस्याओं को अपने कथा साहित्य में वास्तविक धरातल पर साहस के साथ प्रस्तुत करती है महिला कथाकारों में रवीन्द्र कालिया अपनी अलग और मजबूत पहचान बनाने वाली कथा साहित्य का मूलतः विषय स्त्री चेतना ही रहा है। रवीन्द्र कालिया के उपन्यासों में आधुनिकता के नाम पर गिरते मानवीय मूल्यों को बचाने के लिए नारी चेतना को जरूरी बताया गया है। नारी की सजगता ही समाज के अस्तित्व को बचाए रखती है। नारी की भावुकता, सहृदयता व शालीनता उसकी कमजोरी न मानकर मानव मन की विशेषता के रूप में चित्रित किया है। नारी जीवन के यथार्थ पक्ष को निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत किया गया है।

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Pages: 40-42     |    2 View     |    0 Download

How to Cite this Article:

डॉ. प्रभु दयाल शर्मा. रवीन्द्र कालिया के उपन्यासों में नारी चेतना का विश्लेषणात्मक अध्ययन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(1):40-42,