Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 3 ISSUE.: 8(August 2024)
Author(s): गीता और डॉ. प्रकाश लखेडा
Abstract:
उत्तराखण्ड की देवभूमि भारतीय संस्कृति के उद्वभव व सम्बर्द्धन में सदा अग्रणी रही है। लगभग प्रत्येक युग में अवतारी पुरूषांेए ऋषि मुनियों योगी तपस्वियों व कवि तथा चिंतको को इसने अपनी ओर आकर्षित किया है इसके परिणामतः अनेक महान आत्माओं ने इसे अपनी साधना स्थली बनाकर आध्यात्मिक ऊर्जा से पल्लवित किया है। उन्ही में से एक नाम है स्वामी विवेकानन्द जो भारत की महान वैदिक संस्कृति के युग पुरूष के रूप मे विश्व रंग.मंच पर उदित हुए। उनके भीतर भारत ने अपनी संस्कृति के उन सभी तत्वो का चरम विकास पाया जिसके बल से उन्हें विश्व गुरू होने का गौरव प्राप्त हुआ था। वे भारत के अतीत वर्तमान और भविष्य मे महानायक हैं। उनके जीवन व दर्शन के अध्ययन व अनुपालन से व्यक्तिए समाज राष्ट्र व विश्व को ऊँचा उठने और आगे बढने मे निश्चित रूप बडी सहायता मिलेगी। ऐसे दिव्य पुरूष के पावन स्पर्श से उत्तराखण्ड की देव भूमि पुनः धन्य हुई। उन्होनें इसे ध्यानए चिन्तन के केन्द्र तथा एक तीर्थ के रूप में ग्रहण किया। अपने अल्प मगर प्रखर जीवन में वे पाँच बार उत्तराखण्ड की यात्रा पर आये और लगभग 1 वर्ष की अवधि यहाँ भ्रमणए विश्राम व साधना में व्यतीत किया। प्रथम यात्रा उन्होने 1888 ई0 मे ऋषिकेश कीए द्वितीय यात्रा नैनीतालए अल्मोडाए देहरादून की वर्ष 1890 ई0 में तृतीय यात्रा अल्मोडा की वर्ष 1897 ई में चतुर्थ यात्रा फिर अल्मोडा की वर्ष 1898 ई0 में तथा अंतिम पांचवी यात्रा मायावती आश्रम लोहाघाट की वर्ष 1901 में की थी। 1888 से 1890 ई0 तक उन्होंने परिवाजक के रूप में उत्तराखण्ड सहित पूरे उत्तर भारत की यात्रा की तथा अपने आध्यात्मिकए सामाजिक व शैक्षिक संदेश लोगों तक पहुँचाये। विश्व भम्रण के साथ साथ उन्होने उत्तराखण्ड के अनेक नगरों नैनीतालए अल्मोडाए चम्पावतए कर्णप्रयागए श्रीनगरए टिहरीए देहरादूनए और ऋषिकेश का न केवल भ्रमण किया बल्कि वहाँ लोगों को अपना वैश्विक संदेश पहुँचाया। हिमालय के प्रति स्वामी जी की अगाध श्रृद्धाए प्यार और आर्कषण रहा । यही वजह है कि वे प्रायः हिमालय क्षेत्र में ही रहना पसन्द करते थे। हिमालय के इन दिव्य धवल उच्च शिखरों को देखकर उनका मन मस्तिष्क ऊर्जावान हो उठता था।
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How to Cite this Article:
गीता और डॉ. प्रकाश लखेडा. उत्तराखंड में स्वामी विवेकानन्द की यात्राओं का वैशिवक संदेश. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(8):48-54,