Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
Mail: allstudy.paper@gmail.com
Contact: +91-9650866419
Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 3 ISSUE.: 4(April 2024)
Author(s): डॉ. बीरेन्द्र मणि त्रिपाठी
Abstract:
श्रीमद्भगवद्गीता में मानव जीवन के कल्याण हेतु अनेक ज्ञानात्मक तत्व विद्मान है। इसमें निहित मानव तथा उसके पर्यावरण के साथ संबंधों के विषय में तथा पर्यावरणीय चेतना से युक्त और उसमें वृद्धि करने वाले मार्गदर्शन से प्रेरणा प्राप्त की जा सकती है। श्रीमद्भगवद्गीता में पर्यावरण के लिए हितकारी ज्ञान का उल्लेख है। श्रीमद्भगवद्गीता से पर्यावरण तथा मानव के मध्य सकारात्मक अन्तःक्रिया का ज्ञान प्राप्त होता है। श्रीमद्भगवद्गीता से जीवों के प्रति सद्भावना रखने की प्रेरणा मिलती है। श्रीमद्भगवद्गीता से प्राप्त ज्ञान से विश्व कल्याण की शिक्षा और मार्गदर्शन प्राप्त होता है। वर्तमान में श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित पर्यावरणीय चेतना की प्रासंगिकता बनी हुई है। श्रीमद्भगवद्गीता मानव कल्याण हेतु मार्गदर्शन प्रदान करने वाला एक श्रेष्ठ ग्रन्थ है। मानव का कल्याण उसके पर्यावरण से अनिवार्य रूप से जुड़ा हुआ विषय है जिससे सम्बन्धित तत्व हमें श्रीमद्भगवद्गीता में भी प्राप्त होते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता में पर्यावरण के महत्व को स्पष्ट करते हुए कई श्लोक प्राप्त होते हैं और विभिन्न जीव जन्तुओं के प्रति सद्भाव की प्रेरणा भी प्राप्त होती है मानव तथा उसके पर्यावरण के मध्य स्थापित सम्बन्धों को देखने का एक नवीन दृष्टिकोण भी हमें श्रीमद्भगवद्गीता में मिलता है। मानव को अपने परिवेश से अनेक ज्ञानवर्धक प्रत्यय प्राप्त होते हैं जिसमें समस्त सृष्टि के कल्याण के लिए आवश्यक ज्ञानात्मक, भावनात्मक, क्रियात्मक पक्ष भी समाहित हैं। मानव के इन्ही ज्ञानात्मक, भावात्मक, क्रियात्मक पक्षों सही मार्गदर्शन प्रदान करने, उसे समस्त विश्व के कल्याण से जोड़ने का प्रयास श्रीमद्भगवद्गीता में प्राप्त होता है। श्रीमद्भगवद्गीता में संसार के रक्षा हेतु ‘कर्म’ पर बल देने के साथ-साथ सृष्टि की रक्षा पर भी बल दिया गया है।
keywords:
Pages: 48-51 | 3 View | 0 Download
How to Cite this Article:
डॉ. बीरेन्द्र मणि त्रिपाठी. श्रीमद्भगवद्गीता में पर्यावरणीय चेतना. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(4):48-51,