Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 3 ISSUE.: 4(April 2024)
Author(s): शोपतसिंह
Abstract:
वैदिक संस्कृति की भावना ही मानव को शुभ आचरण करने का उपदेश देती हैं। वैदिक संस्कृति में विश्वबन्धुत्व की भावना की अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। इसी आधार पर “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना परवर्ती काल से पत्लवित हुई। वैदिक संस्कृति विश्व को सद्मार्ग अपनाने का उपदेश देती है। वैदिक संस्कृति के आधार बिना जीवन व्यर्थ है। इस बौद्धिक एवं कर्म संघर्षरत युग में मानव की अशान्ति का मूल कारण आत्मविश्वास की उपेक्षा ही है। वैदिक कालीन सामाजिक स्थिति उन्नत दशा में थी । वैदिक संस्कृति का तत्व एक पुनर्जन्मवाद है। यह पारलौकिक भावना ही मानव को शुभ आचरण करने का उपदेश देती हैं। मानव सदाचार आदि का पालन करता हुआ अगले जीवन को सुखद बनाने की चेष्टा करता है। वेद सांस्कृतिक जीवन की समग्र समझ के लिए मार्गदर्शन करते रहते हैं, उनकी कालजयी शिक्षाऐं प्रासंगिक बनी हुई हैं, जो ज्ञान, आध्यात्मिकता और सामंजस्यपूर्ण अस्तित्व की खोज के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
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Pages: 46-47 | 3 View | 0 Download
How to Cite this Article:
शोपतसिंह. वेदों में वर्णित सांस्कृतिक तत्त्वों की विवेचनात्मक समीक्षा।. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(4):46-47,