Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 3 ISSUE.: 2(February 2024)
Author(s): डॉ. शिव कुमार व्यास
Abstract:
गोस्वामी तुलसीदास जी कृत रामचरित मानस वैशिविक धरातल पर स्थापित कालमयी ग्रंथ है, जो उदात्त मानव मूल्यों की प्रतिष्ठा समाज निर्माण एव लोक हितार्थ करता है मानस के चरित्र देशकाल वातावरण के अनुरूप आचरण और व्यवहार करते है तथा अपेक्षित अथवा अनपेक्षित मूल्यों के संवाहक बनकर तत्कालीन समाज को प्रतिबिबित करते है विशेष रूप से इक के नारी पात्रों का अपनी विशिष्टाओ के साथ विविधता पूर्ण चित्रण है मानस में कोशल्यादि रानियाँ पावर्ती सीता अनुसुइया शबरी मंदोदरी आदि आदर्श मूल्यों की रक्षिका है वहीं मंथरा शूर्पणखा आदि भी उसी समाज में है जो अपने समाज के लिए घातक आचरण के कारण निंदा के योग्य है रामचरित मानस नारी चरित्र की समस्त विशिष्टताओं को संपूर्णता में उजागर कर स्थापित करने वाला ग्रंथ है।
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Pages: 47-51 | 2 View | 0 Download
How to Cite this Article:
डॉ. शिव कुमार व्यास. राम चरित मानस में नारी. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(2):47-51,