Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.

Mail: allstudy.paper@gmail.com

Contact: +91-9650866419

INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


Multidisciplinary
Refereed Journal
Peer Reviewed Journal

INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 3 ISSUE.: 10(October 2024)

भील जनजाति मे विवाह की पद्धतियाँः एक भारतीय दर्शन


Author(s): डाॅ. रामेशवर शिन्द


Abstract:

आदिवासी समुदाय एक विस्तृत समुदाय हैं जिनकी अपनी परम्पराएं, रीति-रिवाज, एवं संस्कृति होती है इन्ही मे से एक है विवाह क्योकि विवाह प्रत्येक समाज, चाहे वह आदिम हो या सभ्य समाज उसकी संस्कृति का एक आवश्यक अंग होता है। क्योकि यह वह स्थान है जिसके आधार पर समाज की प्रारंभिक इकाई परिवार का निर्माण होता है। मानव जीवन के सातत्य को बनाये रखने का सबसे मौलिक और सार्वभौमिक समूह परिवार कहलाता है। भीलों में परिवार पितृसत्तात्मक, पितृस्थानीय, पितृवंशीय अधिकार प्राथमिक या एकांकी और मुख्यतः एक विवाही तथा गौत्र बहिर्विवाही होते है किन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि पुरूष प्रधानता के कारण स्त्रियों का महत्व गौण हो जाता है बल्कि कहीं-कहीं स्त्री की प्रधानता के लक्षण भी देखने को मिलते है जैसे भीलों में प्रचलित वधू मूल्य और वधू मूल्य न चुका सकने की स्थिति में विवाह हेतु 5 वर्ष तक स्त्री के घर में कार्य करना, स्त्री को मन पसंद जीवन साथी चुनने की स्वतन्त्रता, लड़की के पैदा होने पर भी उतनी ही खुशी मनाता जितना कि लड़का पैदा होने पर होती है, कार्यो में समान भागीदारी, मामा का महत्व जैसा कि मातृसत्तात्मक परिवारों में होता है।

keywords:

Pages: 26-28     |    7 View     |    0 Download

How to Cite this Article:

डाॅ. रामेशवर शिन्द. भील जनजाति मे विवाह की पद्धतियाँः एक भारतीय दर्शन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(10):26-28,