Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 3 ISSUE.: 1(January 2024)
Author(s): रवि कुमार मीना
Abstract:
ऋग्वेद वर्तमान समय में भी महत्वपूर्ण उपादेयता एवं महत्व रखता है। ऋग्वेद में देवी देवताओं ऋषि आदि संवादों से विभिन्न प्रकार के उपदेश ज्ञान की प्राप्ति होती है। इसकी ऋचाओं और संहिता संग्रह में वर्तमान विश्व का आवश्यक महत्व स्पष्ट दिखाई देता है। ऋग्वेद वेदों में सबसे पुराना है, जो हिंदू धर्म में सबसे पवित्र ग्रंथ है। विद्वानों का मानना है कि ऋग्वेद लगभग ईसा पूर्व सैकड़ों वर्षों में लिखा गया था। 2000 ईसा पूर्व. जिन लोगों ने वेदों को प्रतिपादित किया। परंपरागत रूप से यह माना जाता है कि ऋषियों ने वेदों की रचना नहीं की, बल्कि ये ग्रंथ उनके सामने प्रकट हुए और उन्होंने इन ग्रंथों को लिपिबद्ध किया। उन्होंने सोस (सोम) के उपयोग के माध्यम से इस ज्ञान तक पहुंच प्राप्त की, जो देवताओं द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक दिव्य, नशीला पेय था। जब कोई ऋग्वेद का संदर्भ देता है तो विद्वानों का अनुमान है कि ये अंतिम पुस्तकें 700 ईसा पूर्व के आसपास लिखी गई थीं। ऋग्वेद में हमारे जीवन में गुरु शिष्य परंपरा संस्कृति व्यवहार और ज्ञान के विभिन्न विषयों का समावेश प्रदान करता है।
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How to Cite this Article:
रवि कुमार मीना. ऋग्वेद की वर्तमान समय में उपादेयता एवं महत्व. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(1):76-78,