Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 2 ISSUE.: 9(September 2023)
Author(s): Dr. Sunil Kumar Pandey
Abstract:
प्रत्येक व्यक्ति को मानव की भाँति जीवन जीने, अपने व्यक्तित्व का विकास करने तथा अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक व आर्थिक आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए कुछ नैसर्गिक अधिकारों का होना आवश्यक होता है, जिनको हम मानव अधिकार कहते हैं। ये अधिकार सभी मनुष्यों को जाति, प्रजाति, वर्ग व धर्म के आधार पर भेदभाव किये, बिना समान रूप से मिलना चाहिए। नागरिकों को इन अधिकारों से वंचित करना मानवाधिकारों का उल्लघंन कहा जाता है। मानव अधिकारों के संरक्षण हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानवाधिकारों का सार्वभौमिक घोषणा पत्र जारी किया है। इस चार्टर के अनुबंधों को सभी सदस्य देशों को मानना जरूरी होता है। इसके साथ ही कई राष्ट्रों ने अपने नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अनेक विधिक प्रावधान भी लागू कियें हैं तथा आयोगों व संस्थाओं की स्थापना की है। मानव अधिकारों से संबन्धित इन कानूनी उपबंधों, प्रावधानों, नागरिकों व संस्थाओं का ज्ञान तथा इन अधिकारों के हनन के प्रति प्रतिरोध की भवना मानवाधिकर जागरूकता कहलाती है।
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Pages: 36-39 | 2 View | 0 Download
How to Cite this Article:
Dr. Sunil Kumar Pandey. शिक्षा एवं मानवाधिकार जागरूकता. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2023; 2(9):36-39,