Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 2 ISSUE.: 9(September 2023)
Author(s): डॉ. गोपाल शर्मा
Abstract:
उच्चतर माध्यमिक विद्यालयी शिक्षा का समय विद्यार्थियों के सामान्य विद्यालयी अनुभव एवं विशिष्ट ज्ञान आधारित उच्च शिक्षा का संधि काल होता है । यह विद्यार्थियों की औपचारिक शिक्षा का वह चरण होता है । जिसमें विद्यार्थियों के भावी जीवन की आधारशिला रखी जाती है तथा वे अपने भावी वृत्तिक पथ का चुनाव करने हेतु सही मायने में उच्चतर माध्यमिक विद्यालयी शिक्षा, विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, ज्ञान, कौशल एवं मूल्यों को सुनिश्चित आकार प्रदान करने का कार्य करती है । ऐसे में, विद्यार्थियों के समग्र विकास में, उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है । भारत में विद्यालयी प्रबंधन की प्रकृति एवं स्वरूप में अत्यधिक विविधता है । एक ओर जहाँ सरकारी विद्यालय पर्याप्त संख्या में हैं, वहीं निजी प्रबंधन या स्ववित्त पोषित विद्यालयों की संख्या भी पिछले कुछ दशकों में बढ़ी है । बच्चों की शिक्षा निजी विद्यालयों में कराने हेतु अभिभावकों का रुझान भी हाल के वर्षों में काफी बड़ा है । सरकारी विद्यालयों से विमुख होकर स्ववित्त पोषित विद्यालयों की ओर रुझान होने का एक स्पष्ट कारण यह हो सकता है कि इन विद्यालयों में सुदृढ प्रशासन एवं प्रबंधन तंत्र है, जिसके सफल संचालन की जिम्मेदारी प्रधानाचार्य की होती है । ऐसे में यह अध्ययन करना रोचक होने के साथ-साथ शोध का विषय भी है कि एक प्रधानाचार्य, विद्यार्थियों की अकादमिक आवश्यकताओं को पूरा करते हुए, शिक्षकों, प्रबंधकों और अभिभावकों के मध्य सामंजस्य कैसे स्थापित करता है । विषय-वस्तु विश्लेषण विधि का प्रयोग करते हुए, उपलब्ध साहित्य के समुचित विश्लेषण पर आधारित इस शोध पत्र का केंद्रीय सरोकार स्ववित्त पोषित उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के संदर्भ में दैनंदिन विद्यालयी क्रियाकलाप एवं नीतिगत परिप्रेक्ष्य में प्रधानाचार्य की विभिन्न भूमिकाओं का विवरणात्मक संदर्भ प्रस्तुत करना है ।
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How to Cite this Article:
डॉ. गोपाल शर्मा. माध्यमिक स्तर के विद्यालयों के प्रशासन एवं प्रबंधन में प्रघानाचार्य की भूमिका. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2023; 2(9):17-21,