Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 2 ISSUE.: 8(August 2023)
Author(s): रक्षा एवं उदयवीर सिंह
Abstract:
भारतीय समाज ने इस लिंग भेदभाव की बहुत बड़ी कीमत चुकाई है समाज लगभग 50ः इन स्त्रियों के योगदान से वंचित रहा है। लिंग-भेदभाव यौन पृथक्करण में प्रकट होता है। लड़कों और लड़कियों के जरा बड़े होते ही अलग अलग क्षेत्र हो जाते हैं, उनके खेल भी अलग हैं, पढ़ाई के विषय भी अलग हैं, संस्कार भी अलग हैं और जीवन की पूरी तैयारी अलग अलग होती है। लड़कों के घर से बाहर निकलने के लिये कोई प्रतिबन्ध नहीं होता है, जबकि लड़कियों को घर में रहने के लिये बाध्य किया जाता है। भारत एक विकासशील देश होने के साथ साथ एक कृषि प्रधान देश भी है। सम्पूर्ण भारत के विकसित होने के लिये तीव्र आर्थिक विकास होना अति आवश्यक है, यह विकास तभी सम्भव हो सकता है जब समाज में स्त्री और पुरुष की बराबर की भागेदारी हो। लेकिन वर्तमान समय में जो आज हालात हैं उसमें नारी के साथ अत्यन्त भेदभाव किया जा रहा है क्योंकि पुत्र होने पर घर में उत्सव मनाया जाता है, यदि पुत्री हो जाती है तो वहाँ शोक का माहौल हो जाता है। भारतीय संस्कृति में नारी को बहुत महत्व प्रदान किया गया है, और कहा गया है कि जहाँ पर नारी की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते हैं। अतः अन्त में हम कह सकते हैं कि लैंगिक असमानता एक मीठा जहर है जो पूरे समाज को बर्बादी की कगार पर ले जा रहा है यह तभी सम्भव हो सकता जब इसमें सरकार का सहयोग एवं समाज का सामूहिक प्रयास हो। इसके लिये हमें नारी सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि यदि हम महिलाओं में लैंगिक असमानता इसी तरह करते गये तो समाज में उन्नति होकर भी हम पिछडे़ रहेगें, इसके लिए हमें भारतीय समाज में लोगों की मानसिकता बदलनी होगी, और शिक्षा का स्तर ऊँचा उठाकर महिलाओं की विभिन्न क्षेत्रों में भागीदारी बढ़ानी होगी तभी विकसित समाज तथा समृद्ध भारत का निर्माण हो सकेगा।
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Pages: 102-103 | 3 View | 0 Download
How to Cite this Article:
रक्षा एवं उदयवीर सिंह. भारत में महिलाओं के प्रति लैंगिक असमानता का अध्ययन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2023; 2(8):102-103,