Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 5 ISSUE.: 5(May 2026)
Author(s): चन्द्रहास
Abstract:
छत्तीसगढ़ी काव्य परंपरा हमारे लोकसाहित्य का एक बहुत समृद्ध और जीवंत हिस्सा है, जिसमें वीरता, संघर्ष और बलिदान की बातें गहराई से जुड़ी हुई हैं। यह शोध इस बात को समझने की कोशिश करता है कि छत्तीसगढ़ी कविताओं में युद्ध, संघर्ष और बलिदान को किस तरह सुंदर और प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया है। इससे पता चलता है कि लोककाव्य और आज की छत्तीसगढ़ी कविताएँ सिर्फ इतिहास या समाज के संघर्षों की कहानी नहीं बतातीं, बल्कि उनमें भावनाएँ, संस्कृति और जीवन के अनुभव भी साफ दिखाई देते हैं। इन कविताओं में वीर रस के साथ-साथ करुण और अद्भुत भाव भी मिलते हैं, जो इंसान की भावनाओं को गहराई से छूते हैं। छत्तीसगढ़ी काव्य में युद्ध सिर्फ लड़ाई नहीं है, बल्कि यह सही काम के लिए खड़े होने और अपने कर्तव्य को निभाने का प्रतीक है। संघर्ष समाज में बदलाव लाने की इच्छा को दिखाता है, और बलिदान त्याग और आदर्श की भावना को सामने लाता है। यह शोध यह भी बताता है कि ऐसी कविताएँ समाज की यादों को संभालकर रखती हैं, लोकनायकों को सम्मान देती हैं और लोगों में अपनी पहचान और गर्व की भावना पैदा करती हैं। इसलिए छत्तीसगढ़ी काव्य सिर्फ साहित्य नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को समझने का एक मजबूत माध्यम भी है।
keywords:
छत्तीसगढ़ी काव्य, वीर रस, संघर्ष, बलिदान, सौंदर्यशास्त्र, लोककाव्य, पंडवानी, लोकनायक, सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक पहचान, लोकपरंपरा, समकालीन परिप्रेक्ष्य
Pages: 184-188 | 23 View | 2 Download
How to Cite this Article:
चन्द्रहास. छत्तीसगढ़ी कविताओं में युद्ध, संघर्ष और बलिदान का सौंदर्यशास्त्र. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2026; 5(5):184-188,