Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 5 ISSUE.: 5(May 2026)
Author(s): कृष्ण कुमार
Abstract:
कमलेश्वर नई कहानी आंदोलन के प्रमुख कथाकारों मे से एक है। उनकी कहानियाँ आधुनिक जीवन की जटिलताओं, विडम्बनाओं और मानवीय संवेदनाओं के संकट को अत्यंत सशक्त रूप में अभिव्यक्त करती है। आधुनिकता ने जहाँ मनुष्य को भौतिक सुख सुविधाएँ प्रदान की है वही उसे अकेलापन, असुरक्षा, संबंधो मे कृत्रिमता और मूल्यहीनता भी दी। कमलेश्वर की कहानियाँ इन्हीं अंतर्विरोधों को उजागर करती हैं। उनकी कहानियों में मध्यमवर्गीय जीवन की त्रासदी बार-बार सामने आती है। आर्थिक दबाव, बेरोजगारी, पारिवारिक विघटन और सामाजिक प्रतिस्पर्धा ने व्यक्ति को भीतर से खोखला बना दिया है। ‘राजा निरबंसिया’ जैसी कहानी में सत्ता और सामाजिक प्रतिष्ठा की झूठी चमक के पीछे छिपी मानवीय विडम्बना को चित्रित किया गया है। यहाँ व्यक्ति अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करता है, पर अंततः परिस्थितियों का शिकार बन जाता है। कमलेश्वर की कहानियों में नारी जीवन की पीड़ा भी आधुनिक विडम्बनाओं का महत्वपूर्ण पक्ष है। आधुनिक समाज में स्त्री को स्वतंत्रता का भ्रम तो मिला है, परंतु वास्तविक समानता अभी भी दूर है। दाम्पत्य संबंधों में बढ़ती दूरी, स्वार्थ और संवादहीनता उनके कथानक का हिस्सा बनते हैं। व्यक्ति संबंधों को निभाने के बजाय उपयोग करने लगा है यह आधुनिकता की बड़ी विडम्बना है। शहरी जीवन की भागदौड़, नैतिक मूल्यों का ह्रास और मनुष्य का मशीन बन जाना भी उनकी कहानियों में उभरता है। आधुनिक मनुष्य भीड़ में रहकर भी अकेला है। संवेदनहीनता और आत्मकेन्द्रित जीवन शैली ने सामाजिक रिश्तों को कमजोर कर दिया है। कमलेश्वर इन स्थितियों का यथार्थ चित्रण करते हुए पाठक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी भाषा सरल, सहज और व्यंग्यात्मक प्रभाव से युक्त है, जो आधुनिक जीवन की विसंगतियों को और अधिक तीव्रता से सामने लाती है। वे किसी आदर्शवादी समाधान की बजाय यथार्थ का आईना प्रस्तुत करते हैं। इस प्रकार कमलेश्वर की कहानियाँ आधुनिक जीवन की विडम्बनाओं अकेलेपन, मूल्य संकट, सामाजिक असमानता और संबंधों के विघटन का सजीव दस्तावेज हैं। वे आधुनिक मनुष्य की त्रासदी को समझने और संवेदना को पुनर्जीवित करने का आह्वान करती है।
keywords:
आधुनिकता, नई कहानी आंदोलन, मूल्य संकट, पारिवारिक विघटन, स्त्री चेतना, अस्तित्व बोध, सामाजिक यथार्थ, जीवन की विसंगतियाँ, मानवीय संवेदना।
Pages: 169-173 | 21 View | 2 Download
How to Cite this Article:
कृष्ण कुमार. कमलेश्वर की कहानियाँ: बदलते सामाजिक मूल्य और आधुनिकता-बोध. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2026; 5(5):169-173,