Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 5 ISSUE.: 2(February 2026)
Author(s): रितेश कुमार सेन
Abstract:
डिजिटल युग में लोक साहित्य और संस्कृति की चर्चा भारत की प्राचीन संस्कृति के विकास से शुरू होती है, जिसमें लोक साहित्य जैसे लोकगीत, कथाएँ और कहावतें शामिल हैं। डिजिटल तकनीकों के माध्यम से, लोक साहित्य को सहेजना और साझा करना आसान हुआ है, जैसे डिजिटल आर्काइविंग और सोशल मीडिया का उपयोग। हालांकि, डिजिटल युग ने मानसिक स्वास्थ्य, गोपनीयता, और सामाजिक जुड़ाव पर नकारात्मक प्रभाव भी डाला है। इसके बावजूद, यह लोक साहित्य के संरक्षण, वैश्विक पहुंच, और लोक कलाकारों के लिए नए व्यावसायिक अवसर प्रदान कर रहा है। भारत सरकार द्वारा कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जैसे शताब्दी महोत्सव योजना और पांडुलिपियों पर राष्ट्रीय मिशन जो की यह डिजिटल माध्यमों से लोक संस्कृति के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
keywords:
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, लोक साहित्य, लोक संस्कृति, सोशल मीडिया, एन.लिस्ट, शोध सिंधु, सी.डेक., वेबकॉमिक्स, ई-ज्ञानकोश।
Pages: 42-45 | 122 View | 6 Download
How to Cite this Article:
रितेश कुमार सेन. डिजिटल युग में लोक साहित्य और संस्कृति. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2026; 5(2):42-45,