Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 5 ISSUE.: 1(January 2026)
Author(s): डॉ. वर्षा सूर्यवंशी
Abstract:
पुरातात्विक स्त्रोतों एवं चीनी विद्वान केगटाई के आधार पर यह प्रमाणित किया जा सकता है कि कम्बुज में सर्वप्रथम महायान धर्म का प्रवेश हुआ था और आगे चलकर लंका में हीनयान बौद्ध धर्म का प्रवेश हुआ। कम्बुज के कुछ शासक बौद्ध होते हुए भी ’राजकीय देवराज’ मत का विरोध न कर सके, पर बुद्ध को भी त्रिमूर्ति में स्थान दिया। आगे चलकर देवराज मंदिर में उसकी स्थापना हुई। कम्बुज देश में बौद्ध धर्म के महायान मत का पहले प्रवेश हुआ किंतु हीनयान बौद्ध धर्म के प्रवेश ने इस संतुलन को विभिन्नता में परिवर्तित कर दिया। महाथेर सिरि सिरिन्दमोलि (श्री इन्द्रमौलि) को एक गाँव देने का उल्लेख है और 1231 ई. में एक विहार का निर्माण हुआ जहाँ एक बौद्ध प्रतिमा स्थापित की गयी। सम्राट् ने इस विहार को चार गाँव प्रदान किये। सीलोन के हीनयान का बौद्ध मत से सम्बन्धित यह सर्वप्रथम लेख है।
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Pages: 144-145 | 22 View | 1 Download
How to Cite this Article:
डॉ. वर्षा सूर्यवंशी. बौद्ध धर्म का प्रसारः एक अध्ययन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2026; 5(1):144-145,