Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 4 ISSUE.: 9(September 2025)
Author(s): नरेश कुमार
Abstract:
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहाँ चुनाव ही वह माध्यम है जिसके द्वारा जनता अपनी राजनीतिक इच्छाओं और आकांक्षाओं को पूर्ति करती है। स्वतंत्रता के बाद से ही भारत में चुनाव प्रक्रिया का स्वरूप बदलता रहा है। प्रारंभिक वर्षों में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे, लेकिन समय के साथ यह परंपरा टूट गई। वर्तमान समय की स्थिति यह है कि लगभग प्रत्तेक वर्ष देश के किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहते हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में "एक राष्ट्र, एक चुनाव" की अवधारणा उभरी है। इसका तात्पर्य है कि संपूर्ण भारत में लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएँ। यह मुद्दा राजनीतिक, प्रशासनिक और संवैधानिक बहस का केंद्र बन चुका है। "एक राष्ट्र, एक चुनाव" का विचार भारतीय लोकतंत्र के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके पक्ष में तर्क है कि इससे चुनाव खर्च घटेगा, प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी और नीतियों के क्रियान्वयन में स्थिरता आएगी। जबकि विरोध में तर्क है कि यह भारतीय संघीय ढाँचे और राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर कर देगा।
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How to Cite this Article:
नरेश कुमार. एक राष्ट्र, एक चुनाव: भारतीय लोकतंत्र में संभावनाएँ और चुनौतियाँ. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(9):52-56,