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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 4 ISSUE.: 8(August 2025)

कछवाहा वंश के आदि पुरखा राव शेखा एवं शिखरगढ़ निर्माण


Author(s): हेमन्त सिंह


Abstract:

राव शेखाजी कछवाहा वंश में पैदा हुऐ। राव शेखा का जन्म नाण के शासक मोकल कछवाहा की राणी निरवाण से औज सुदी विजयादशमी, वि.सं. 1490 तदनुसार 24 सितम्बर, 1433 को हुआ था। पिता का स्वर्गवास होने के उपरान्त राव शेखाजी वि.स. 1502 में बरवाड़ा एवं नाण के 24 गांवों की जागीर के उत्तराधिकारी बने। उन्होंने अपने पुरुषार्थ के बल पर पैत्रिक राज्य आमेर के बराबर 360 गांवों पर अधिकार कर एक नए स्वतंत्र कछवाहा राज्य की स्थापना की तथा शेखावाटी साम्राज्य की नींव रखी। राव शेखाजी को अपने बल, वैभव और राज्य विस्तार के अनुरूप ही राजधानी की आवश्यकता थी। नाण छोटी जगह थी, इसलिए नाण से कुछ दूर ही उन्होंने अपने गढ़ की नींव रखी और बस्ती बसाना प्रारम्भ किया। शेखाजी ने इसे वि.सं. 1517 में अपनी राजधानी बनाया और इसका नाम 'अमरसर' रखा। अमरसर की यह भूमि अपने उत्कर्ष काल में युद्धों और शाकों की भूमि रही है। अमरसर बसाने के बाद शेखाजी ने पहाड़ों से सुरक्षित एक सुदृढ़ दुर्ग बनाने का निश्चय किया। अमरसर से पूर्व में कुछ मील दूरी पर जगदीश पर्वतमाला के पश्चिम ढ़ाल की उपत्यका को उन्होंने इसके लिए चुना। वह स्थान तीन तरफ से पहाड़ी चोटियों की प्राकृतिक प्राचीर से घिरा हुआ था। घाटी का एक पश्चिम भाग केवल खुला हुआ था। शेखाजी ने उस खुले भाग को विशाल ऊंची दिवार बनवाकर बन्द करवाया तथा उसमें प्रवेश के लिए एक मजबूत विशाल दरवाजा लगवाया। उस प्राकुतिक दूर्ग का नाम उन्होंने 'शिखरगढ़' रखा।

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Pages: 49-51     |    1 View     |    0 Download

How to Cite this Article:

हेमन्त सिंह. कछवाहा वंश के आदि पुरखा राव शेखा एवं शिखरगढ़ निर्माण. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(8):49-51,