Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.

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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 4 ISSUE.: 7(July 2025)

निराला के काव्य मे संघर्ष एवं क्रान्तिकारी चेतना।


Author(s): शोधार्थी मंजु जसैल एंव शोध निर्देशक डॉ. धनेश कुमार मीणा


Abstract:

सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ हिन्दी का छायावादी कवियों में महत्वपूर्ण स्थान है। उनकी कविता में नव जागरण का संदेश है, प्रगतिशील चेतना है तथा राष्ट्रीयता का स्वर विद्यमान है। मानव की पीड़ा, परतन्त्रता के प्रति तीव्र आक्रोश उनकी कविता में है, तथा अन्याय एवं असमानता के प्रति विद्रोही की भावना उनमें सर्वत्र व्याप्त है। परिस्थितियों के घात-प्रतिघात ने उन्हें, उदबुद्ध, सचेत एवं जागरूक कवि के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया। अन्याय, अत्याचार एवं असमानता के विरूद्ध वे जीवन भर संघर्ष करते रहे। मानव की पीड़ा ने उनके संवेदनशील हृदय को करूणा से प्लावित कर दिया था। उच्च वर्ग की विलासिता एवं निम्न वर्ग की दीनता को देखकर वे अपने हृदय में गहन वेदना, टीस, छटपटाहट का अनुभव करते थे। फलतः ‘निराला’ द्वारा रचित काव्य की प्रासंगिता वर्तमान में उन्मेषमूलक अर्थवत्ता प्रदान करने में पूर्णतः सक्षम है।

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How to Cite this Article:

शोधार्थी मंजु जसैल एंव शोध निर्देशक डॉ. धनेश कुमार मीणा. निराला के काव्य मे संघर्ष एवं क्रान्तिकारी चेतना।. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(7):01-03,