Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 4 ISSUE.: 6(June 2025)
Author(s): श्याम बिहारी सिंह
Abstract:
एक ग्रामीण के लिए समुदाय का विस्थापन आजीविका की दृष्टि से और सामाजिक सांस्कृतिक दृष्टिकोण से एक आघात है। ग्रामीण समुदायों में विस्थापन के मुद्दों की जांच सिर्फ कागज में रहता है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आदिवासी जो बाहरी दुनिया से अपेक्षाकृत अपरचित होता है। आधुनिक समय में विकास हेतु विभिन्न परियोजनाओं और तकनीकी व प्रौद्योगिकी की आवश्यकता है। और जिसके कारण हर साल, दुनिया भर में लाखों लोगों को बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं के कारण स्थान्तरण और विस्थापन करना पड़ता है मूल स्थान छोड़ने के पश्चात विस्थापितों के जीवन में अनेक परिवर्तन आते है विस्थापन के फलस्वरूप उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था न होने के कारण एक गम्भीर समस्या समाज में दिखाई पड़ रही है। आधुनिकीकरण से प्रेरित विस्थापन जो ग्रामीण समुदायों के लिए एक चुनौती है जहाँ उनको समाज, परिवार, भूमि आदि से विघटित होना पड़ता है इसके अलगाव से पूरा समुदाय प्रभावित होता है । अध्ययन में विकास परियोजनाओं से प्रभावित लोंगो के बारे में साहित्य और व्यवहारिक रूप में एक अंतर पाया जाता है।
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Pages: 89-93 | 1 View | 0 Download
How to Cite this Article:
श्याम बिहारी सिंह. सिंगरौली जिले में विस्थापित ग्रामीणों के जीवन शैली में बदलते हुए सामाजिक-सांस्कृतिक स्थिति. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(6):89-93,