Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.

Mail: allstudy.paper@gmail.com

Contact: +91-9650866419

INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


Multidisciplinary
Refereed Journal
Peer Reviewed Journal

INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 4 ISSUE.: 6(June 2025)

प्रेमचंद की कहानियों में मानवेतर संवेदनाएं: अधिकार चिंता, स्वत्त्व रक्षा, मुक्तिधन, और पूर्व संस्कार के विशेष सन्दर्भ में


Author(s): छवि राज


Abstract:

प्रस्तुत शोध पत्र में मुंशी प्रेमचंद की कहानियों के अंतर्गत पशु-पक्षियों के प्रति अभिव्यक्त करुणा, नैतिकता और संवेदनशीलता के विविध पक्षों का विश्लेषण किया गया है। 'अधिकार चिंता', 'स्वत्व रक्षा', 'मुक्तिधन' और 'पूर्व संस्कार' जैसी कहानियाँ दर्शाती हैं कि प्रेमचंद की दृष्टि केवल मानव-केन्द्रित न होकर समस्त जीव-जगत की चेतना को सहानुभूति और गरिमा से देखती है। कहानी ‘अधिकार चिंता’ में टॉमी नामक कुत्ते के माध्यम से सत्ता, असुरक्षा और उपनिवेशवाद का प्रतीकात्मक चित्रण किया गया है, जबकि ‘स्वत्व रक्षा’ में आत्मसम्मान की रक्षा के लिए संघर्षरत घोड़े की कथा के माध्यम से सामाजिक रीति-रिवाजों पर व्यंग्य किया गया है। ‘मुक्तिधन’ में रहमान और दाऊदयाल के माध्यम से करुणा, धर्मनिरपेक्षता और पशु-प्रेम को मानवता का आधार माना गया है। वहीं ‘पूर्व संस्कार’ में एक बैल के रूप में जन्मे आत्मा के माध्यम से पुनर्जन्म, प्रायश्चित और मोक्ष की आध्यात्मिक अवधारणा को उकेरा गया है। इन कहानियों के माध्यम से प्रेमचंद यह संदेश देते हैं कि पशु-पक्षी भी संवेदना, करुणा और अधिकारों के अधिकारी हैं।

keywords:

Pages: 136-139     |    1 View     |    0 Download

How to Cite this Article:

छवि राज. प्रेमचंद की कहानियों में मानवेतर संवेदनाएं: अधिकार चिंता, स्वत्त्व रक्षा, मुक्तिधन, और पूर्व संस्कार के विशेष सन्दर्भ में. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(6):136-139,