Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 4 ISSUE.: 2(February 2025)
Author(s): डॉ जीतेंद्र बैरवा
Abstract:
प्रस्तुत लेख अखंड भारत के अनन्य सेवक प्रखर राष्ट्रभक्त एवं समस्त हिंदू समाज को अपने गौरवशाली अतीत का स्मरण करानेवाले स्वयंसेवकों और नई पीढ़ी को संस्कारित करनेवाले महान् राष्ट्रवादियों को समर्पित है। यह संगठन भारतीय संस्कृति और नागरिक समाज के मूल्यों को बनाए रखने के आदर्शों को बढ़ावा देता है और बहुसंख्यक हिंदू समुदाय को मजबूत करने के लिए हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार करता है। संघ की सबसे बड़ी विशेषता उसकी कार्यप्रणाली है। संघ की वृद्धि का कारण भी यही है। इसी से यह अन्य संगठन और संस्थाओं से अलग है । बाकी संस्थाएँ धरना-प्रदर्शन, वार्षिकोत्सव, धर्मसभा आदि के माध्यम से काम करती हैं पर संघ की कार्यप्रणाली का केंद्र दैनिक शाखा और उसमें होनेवाले कार्यक्रम हैं। स्वयंसेवक की पहचान उसके राष्ट्रीय विचार और सद्व्यवहार से होती है किसी विशिष्ट वेश या बाहरी चिह्न से नहीं। संघ हिंदू समाज में नहीं, हिंदू समाज का संगठन है। इसलिए स्वयंसेवक समाज में बाकी सबकी तरह ही रहता है। देश में जब भी आपदा आई है संघ ने उल्लेखनीय कार्य किया है। जीवन के हर क्षेत्र में इस संगठन की उपस्थिति ध्यानाकर्षण करनेवाली है। इसी कारण सबको ऐसे विलक्षण संगठन को जानने-समझने की आकांक्षा रहती है। शिक्षा, सेवा, चिकित्सा, विज्ञान, विद्यार्थी, मजदूर, अधिवक्ता, राजनीति आदि समाज के प्रमुख क्षेत्रों में संघ की सार्थक उपस्थिति है। संघ की ऊर्जा का मूल स्रोत हैं दैनिक शाखा। शाखा ही संघ की बुनियाद है जिसके ऊपर आज यह इतना विशाल संगठन खड़ा हुआ है। यहां संक्षेप में यह बताया गया है कि संघ का सूत्रपात कब हुआ, इसका स्वरूप कैसा है, शाखा क्या है एवं इसके विभिन्न शिविरों की संकल्पना क्या है।
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How to Cite this Article:
डॉ जीतेंद्र बैरवा. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: एक समालोचना. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(2):40-42,