Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
Mail: allstudy.paper@gmail.com
Contact: +91-9650866419
Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 4 ISSUE.: 12(December 2025)
Author(s): रामभजन पासवान एवं डॉ. अभय कुमार सिंह
Abstract:
15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्रता हासिल करने के साथ भारतीय समाज की पुनर्रचना की प्रयासों के एक विराट दौर की शुरुआत हुई। इस दौर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की गई, अनेक अविस्मरणीय संघर्ष हुए, इस पुनर्रचना के प्रश्न को केन्द्र कर कई वैचारिक-राजनीतिक धाराएँ जन्म ले चुकी थी साथ ही राष्ट्र-निर्माण, सामाजिक पुनर्गठन और लोकतांत्रिक विस्तार की प्रक्रिया एक नए चरण में प्रवेश करती है, जहाँ लोकतंत्र को सामाजिक असमानताओं को कम करने तथा वंचित समुदायों को राजनीतिक मुख्यधारा में स्थान दिलाने के प्रभावी साधन के रूप में देखा गया। बिहार जैसी जटिल एवं जाति-आधारित सामाजिक संरचना वाले राज्य में दलित समुदायों की राजनीतिक सक्रियता, नेतृत्व के उभार, सामाजिक चेतना, संगठित संघर्ष और नीतिगत हस्तक्षेपों ने राज्य की राजनीति को नए आयाम प्रदान किए। स्वतंत्रता-पूर्व विकसित अनेक सामाजिक दृढ़ राजनीतिक विचारधाराओं ने स्वतंत्रता के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी वैधता और प्रभाव को और अधिक मजबूत किया, जिसके परिणामस्वरूप दलित वर्गों में अधिकार-चेतना, प्रतिनिधित्व की आकांक्षा तथा राजनीतिक सहभागिता का विस्तार हुआ। यह शोध पत्र इस तथ्य को रेखांकित करता है कि लोकतंत्र ने यद्यपि इन समुदायों को नए अवसर, राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक उन्नति के मार्ग प्रदान किए, किन्तु सामाजिक विषमता, राजनीतिक वर्चस्ववाद, आर्थिक निर्बलता, शिक्षा एवं संसाधनों की कमी तथा संस्थागत अवरोध जैसी चुनौतियाँ आज भी उनके समक्ष गंभीर रूप से विद्यमान हैं। प्रस्तुत शोध का उद्देश्य दलित समुदायों की राजनीतिक उपस्थिति, संघर्षों की प्रकृति, उपलब्धियों, सीमाओं एवं भविष्य की संभावनाओं को निष्पक्षता, तथ्यपरकता और गहन विश्लेषण के साथ स्पष्ट करना है, ताकि बिहार के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में उनके योगदान एवं परिवर्तनकारी हस्तक्षेपों को अधिक व्यापक एवं वस्तुनिष्ठ दृष्टि से समझा जा सके।
keywords:
Pages: 77-79 | 2 View | 2 Download
How to Cite this Article:
रामभजन पासवान एवं डॉ. अभय कुमार सिंह. स्वातंत्र्योत्तर बिहार की राजनीति में दलित प्रभावः संघर्ष, सफलताएं और चुनौतियां. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(12):77-79,