Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 4 ISSUE.: 10(October 2025)
Author(s): Dr. Sonu
Abstract:
बौद्ध वेदिकाओं का उद्भव एवं विकास बौद्ध वास्तुकला के इतिहास का एक महत्वपूर्ण पहलू दर्शाता है जिसमें कार्यक्षमता, आध्यात्मिकता और कलात्मक अभिव्यक्ति का संयोजन है । मौर्य काल के दौरान प्राचीन भारत में उत्पन्न, बौद्ध वेदिकाओं को मुख्य रूप से पवित्र सीमाओं को सीमांकित करने और परिक्रमा (प्रदक्षिणा) जैसे अनुष्ठान प्रथाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था । सदियों से उनका डिज़ाइन विकसित हुआ जो क्षेत्रीय अनुकूलन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामग्री और शिल्प कौशल में प्रगति को दर्शाता है । यह लेख बौद्ध वेदिका की ऐतिहासिक उत्पत्ति, प्रतीकात्मक महत्व, स्थापत्य शैली, क्षेत्रीय विविधताओं और आधुनिक व्याख्याओं की जाँच करता है । यह उनके संरक्षण में चुनौतियों और समकालीन वास्तुकला पर उनके स्थायी प्रभाव का भी मूल्यांकन करता है सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण तत्वों के रूप में उनकी भूमिका पर जोर देता है ।
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Pages: 112-116 | 3 View | 0 Download
How to Cite this Article:
Dr. Sonu. बौद्ध वेदिकाओं का उद्भव एवं विकास: एक संक्षिप्त अध्ययन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2025; 4(10):112-116,