Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 3 ISSUE.: 8(August 2024)
Author(s): प्रतिभा यादव एंव डॉ0 नितिन बाजपेयी
Abstract:
इंटरनेट और उस पर उपलब्ध सामग्री की सर्वसुलभता ने साहित्यिक चोरी की संभावना को बढ़ा दिया है डिजिटल सामग्री की उपलब्धता ने कॉपी पेस्ट के अवसरों को आसान बना दिया है इसके साथ ही शोधकर्ताओं में शोध कौशल की कमी, प्रेरणा की कमी, अज्ञानता, आलस्य, कैरियर दबाव, अकादमिक दबाव, सहकर्मी दबाव और साहित्यिक चोरी कानून में शिथिलता आदि ने शैक्षिक एवं अनुसंधान के क्षेत्र में साहित्यिक चोरी को बढ़ावा दिया है जो एक गंभीर अपराध होते हुए भी सामान्यतः प्रचलन में है और यह शैक्षिक अकादमिक अखंडता, नैतिकता, पारदर्शिता का उल्लंघन है जो एक गंभीर समस्या का रूप लेता जा रहा है जिसके लिए विभिन्न कानूनो व दिशा निर्देशों का निर्माण किया गया है आवश्यकता इनके कड़ाई से पालन तथा त्वरित व कड़ी दंड व्यवस्था के अनुपालन से है साहित्यिक चोरी रुके इसके लिए इसके कुप्रभाव एवं हानि तथा परिणामो के प्रति शोधकर्ताओं को जागरूक किया जाए पाठ्यक्रम में शोध नैतिकता के पाठ को आवश्यक रूप से पढ़ाया जाए तथा विश्वविद्यालयों को इसकी गंभीरता को समझते हुए अपने निगरानी तंत्र को इतना मजबूत करना चाहिए की चोरी करने वाले किसी भी तरह से बच ना पाए। सामान्यतः देखा गया है कि विश्वविद्यालय शोध छात्रों से ही साहित्यिक चोरी की रिपोर्ट लाने को कहते हैं जिससे वह स्वयं से जांच कर उसकी पैराफ्रेजिंग एवं रिपोर्ट में बदलाव आदि उपायों को अपनाकर रिपोर्ट सुधार लेते हैं। जब कि होना यह चाहिए कि विश्वविद्यालय शोध प्रस्ताव से लेकर शोध प्रबंध तक स्वयं की जांच प्रणाली का प्रयोग कर रिपोर्ट बनानी चाहिए और चोरी पकडे जाने पर यूजीसी दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही करते हुए साहित्यिक चोरों को एक कड़ा संदेश देना चाहिए। साहित्यिक चोरी की प्रेरणा तब और मिलती है जब चोरी सफल हो जाती है। अतः शोध पत्रों के प्रकाशन से लेकर शोध प्रबंध को पास होने तक सभी प्रकार की साहित्यिक चोरी पर निगरानी अवश्य रखनी चाहिए और दंडित करना चाहिए ताकि शोध के क्षेत्र की इस समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सके। प्रस्तुत शोध आलेख साहित्यिक चोरी का अर्थ, प्रकार, प्रभाव, परिणाम और कानूनी प्रावधानों का विश्लेषण कर अनुसंधान क्षेत्र की इस समस्या के प्रति जागरूकता और समाधान प्रस्तुत करता है।
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Pages: 103-108 | 2 View | 0 Download
How to Cite this Article:
प्रतिभा यादव एंव डॉ0 नितिन बाजपेयी. शोध के क्षेत्र में साहित्यिक चोरी का प्रभाव: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(8):103-108,