Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 3 ISSUE.: 8(August 2024)
Author(s): डॉ. प्यारेलाल आदिले
Abstract:
डॉ. भीमराव अंबेडकर भारतीय समाज के सबसे प्रभावशाली और महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों में से एक हैं, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. अंबेडकर का सबसे बड़ा योगदान भारतीय संविधान का निर्माण है, जो न केवल एक विधिक दस्तावेज है, बल्कि एक समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने संविधान के माध्यम से सभी नागरिकों के लिए समानता, स्वतंत्रता, और बंधुत्व के सिद्धांतों को स्थापित किया, जिससे समाज में वंचित और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। डॉ. अंबेडकर ने समाज में व्याप्त जातिवाद और भेदभाव के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने दलितों और अछूतों के अधिकारों की रक्षा के लिए कई सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का नेतृत्व किया, जिससे भारत में सामाजिक सुधार की दिशा में बड़े बदलाव संभव हुए। उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप, अस्पृश्यता का उन्मूलन और दलितों के लिए शिक्षा और रोजगार में आरक्षण की व्यवस्था लागू हुई, जो उनके समग्र विकास के लिए आवश्यक थी। इसके अतिरिक्त, डॉ. अंबेडकर ने आर्थिक सुधारों की भी वकालत की, जिनका उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। उनके विचारों ने भारत की आर्थिक नीतियों को भी प्रभावित किया, जिससे गरीबी उन्मूलन और आर्थिक विकास को गति मिली। उन्होंने जल संसाधन प्रबंधन, औद्योगिकीकरण और श्रम सुधारों पर भी जोर दिया, जिससे भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिला। डॉ. अंबेडकर का राष्ट्र निर्माण और विकास में योगदान केवल उनके जीवनकाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके विचार और नीतियाँ आज भी भारत के सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका जीवन और कार्यभार राष्ट्र के समग्र विकास के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
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Pages: 135-140 | 3 View | 0 Download
How to Cite this Article:
डॉ. प्यारेलाल आदिले. राष्ट्र निर्माण एवं विकास में डॉ. अंबेडकर का योगदान. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(8):135-140,