Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 3 ISSUE.: 7(July 2024)
Author(s): हिमांशु थपलियाल व डॉ0 प्रकाश लखेड़ा
Abstract:
भारतवर्ष का अतीत अत्यन्त गौरवशाली रहा है इसका प्रमाण अनेक विद्याओं से परिपूर्ण ग्रंथों से प्राप्त होता है। भारतीय ग्रंथों पर दृष्टिपात करें तो अनेक ग्रन्थ अपने आप में ज्ञान की अमूल्य निधियां समेटे हुए हैं। इन्हीं प्राचीन ग्रंथों में से श्रीमद्भागवत पुराण एक पवित्र हिंदू धर्मग्रंथ है जो दार्शनिक और राजनीतिक विचारों के समृद्ध भंडार के रूप में कार्य करता है। इसने सदियों से भारतीय उपमहाद्वीप को गहराई से प्रभावित किया है। इस शोध पत्र का उद्देश्य श्रीमद्भागवत पुराण में निहित जटिल और बहुआयामी राजनीतिक दर्शन का पता लगाना, शासन की अवधारणाओं, संप्रभुता की प्रकृति, शासकों और शासितों के बीच संबंधों और राजनीतिक क्षेत्र में नैतिकता और धर्म की भूमिका की जांच करना है। यह पत्र शासक के आदर्श गुणों और जिम्मेदारियों, राजाओं के दैवीय अधिकार की अवधारणा और आध्यात्मिक एवं सांसारिक अधिकार के बीच संतुलन के बारे में पाठ के दृष्टिकोणों पर गहराई से विचार करता है। इसके अतिरिक्त, यह कल्याणकारी राज्य की अवधारणा, नागरिकों के कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों और समकालीन भारतीय समाज एवं उसके भविष्य के लिए इसके राजनीतिक दर्शन के व्यापक निहितार्थों पर पुराण की शिक्षाओं के प्रभाव का विश्लेषण करता है। श्रीमद्भागवत पुराण समेत प्राचीन ग्रंथों की अपनी व्यापक खोज के माध्यम से, यह शोध पत्र विभिन्न जटिल राजनीतिक विचारों की गहरी समझ में योगदान देगा, जिन्होंने भारतीय सांस्कृतिक और बौद्धिक परिदृश्य को आकार दिया है।
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Pages: 70-72 | 2 View | 0 Download
How to Cite this Article:
हिमांशु थपलियाल व डॉ0 प्रकाश लखेड़ा. भारतीय ग्रंथों में राजनीतिक दर्शन: श्रीमद्भागवत पुराण के विशेष सन्दर्भ में. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(7):70-72,