Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 3 ISSUE.: 5(May 2024)
Author(s): डॉ. बेनज़ीर
Abstract:
भाषा व संस्कृति मनुष्य जीवन का अभिन्न अंग है। संस्कृति विशेष समूह के लोगों के सामूहिक विशेषताओं ज्ञान जैसे परम्पराओं, भाषा, धर्म, भोजन, संगीत, मानदंडो, रीति-रिवाजों और मूल्यों को संर्भित करती है, वही भाषा, समाज के निर्माण व सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण साधन है। भारत साझी मूल्यों वाली संस्कृति का वाहक है, कहने का आशय यह है कि देश का कोई भी व्यक्ति किसी भी समुदाय, जाति धर्म का क्यों न हो सर्वप्रथम वह देश का नागरिक उससे सम्बन्धित कोई भी समस्या उसकी निजी समस्या नहीं वरन भारतीय समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए। यह सत्य है कि देश में प्रत्येक समुदाय अपनी खास सांस्कृतिक पहचान रखने के कारण एक दूसरे से कुछ भिन्न प्रतीत होते हैं जैसे-हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई तथा अन्य समुदाय। यदि बात मुस्लिम समुदाय के सन्दर्भ में की जाय तो, लोगों में इस समुदाय विशेष के प्रति अनेक भ्रांतियां है। इस लेख में इसकी वास्तविकता क्या है इसे समझने का प्रयास करेंगे। आज तेजी से बढ़ते बाजारवाद, उत्तरआधुनिकता ने अनेक चुनौतियों को जन्म दिया है। सांस्कृतिक मूल्य, भाषा आदि अपनी वास्तविकता खोते जा रहे हैं, जिसमें इस समाज के समक्ष अधिक कठिनाई खड़ी कर दी हैं। आजादी के लगभग सत्तर सालों बाद भी इनमें कोई खास परिवर्तन नहीं दिखाई पड़ता। अनेक प्रश्न जैसे-नागरिकता का सवाल, उर्दू मुसलमानों की ही भाषा है, खानपान, वेश-भूषा, आधुनिकता विरोधी परम्परागत रूढ़िवादी समाज, अशिक्षित एवं आर्थिक बदहाली का शिकार, कट्टर धार्मिक कानून आदि जोकि इनकी धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत है। ऐसे में भाषा एवं संस्कृति का प्रश्न विचारणीय है।
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Pages: 24-27 | 4 View | 0 Download
How to Cite this Article:
डॉ. बेनज़ीर. भारतीय मुस्लिम समुदायः भाषा एवं संस्कृति. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(5):24-27,