Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.

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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 3 ISSUE.: 5(May 2024)

नवपूंजीवाद में स्त्री समाज


Author(s): डॉ प्रियंका कुमारी


Abstract:

नवपूंजीवाद का मूल केन्द्र बिन्दु ‘अर्थ’ है। वर्तमान समय में पूंजी आधारित यह आर्थिक व्यवस्था विज्ञापन बाज़ार पर टिका हुआ है। नवपूंजीवाद और मीडिया के बदौलत, विज्ञापन बाज़ार पूरे विश्व पर प्रभावी रूप से अपना अधिपत्य स्थापित कर चुका है। विश्व के सुपर शक्ति देश हों या विकसित या तीसरी दुनिया के देश, सभी देशों पर विज्ञापन बाज़ार अंगद की तरह अपना पैर जमा चुका है। वैश्विक समाज पर इसका असर ‘ग्लोबल गाँव’ के रूप में देखने को मिल रहा है। मिश्रित अर्थव्यवस्था पर आधारित भारतीय समाज ने भी आज दिल खोलकर नवपूंजीवाद को अपनाया है। इस व्यवस्था ने भारतीय समाज के सभी अंगों को प्रभावित किया है। भारत की आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सभी व्यवस्थाओं में नवपूंजीवाद से परिवर्तन हुआ है। भारतीय समाज चिरकाल से लगातार परिवर्तित होता रहा है। लेकिन वर्तमान समय की बात की जाए, तब हम देखते हैं कि बाज़ार के प्रारंभिक विचारों से जन्मी पूंजीवाद की उत्तराधिकारी नवपूंजीवाद ने इस समाज को तीव्रता से परिवर्तित किया है। जिसमें इसका पूरा सहयोग विज्ञापन बाज़ार ने मीडिया के माध्यम से किया है। भारत में भूमंडलीकरण का तत्व बहुत पहले से विद्यमान था। लेकिन भारत की बंद अर्थव्यवस्था के कारण वह अपने वास्तविक रूप में सामने नहीं आ पा रहा था। यह भारत के उच्चवर्गीय लोगों तक ही सीमित था, जो आसानी से वैश्विक बाज़ार का उपभोग कर सकते थे। या कुछ अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारिक कम्पनियां जो बंदिशों के साथ भारत में स्थापित थी। उनके माध्यम से भूमंडलीय बाज़ार और वस्तुओं से भारतीय समाज का परिचय होता था। सन् 1991 में ‘नई आर्थिक सुधार’ नीति के आने से भारत की अर्थव्यवस्था को उदार बनाते हुए, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खोल दिया गया। जिस वजह से नवपूंजीवाद के आधार स्तंभ उदारीकरण, वैश्वीकरण और निजीकरण का विकास यहाँ शीघ्रता से हुआ। भारतीय समाज भी खुद को आधुनिक और वैश्विक नागरिक बनाने के लिए भूमंडलीकरण के रंग में रंगने लगा। एल.पी.जी. एक शुद्ध आर्थिक टर्म एवं शुद्ध अर्थव्यवस्था पर आधारित है। लेकिन इसने भारतीय समाज के सभी आधारभूत स्तंभ पर अपना यथोचित्त प्रभाव डाला है।

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How to Cite this Article:

डॉ प्रियंका कुमारी. नवपूंजीवाद में स्त्री समाज. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(5):21-23,