Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.

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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 3 ISSUE.: 12(December 2024)

भारतीय लोकतंत्र और राजनीतिक दल


Author(s): प्रो. फिरत राम एंव प्रोफेसर प्यारेलाल आदिले


Abstract:

भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक प्रणाली है, जो विविधता, सहिष्णुता और बहुलवाद पर आधारित है। भारतीय लोकतंत्र की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बहुदलीय प्रणाली है, जो राजनीतिक दलों को जनप्रतिनिधित्व और नीति निर्माण में एक प्रमुख भूमिका प्रदान करती है। राजनीतिक दल न केवल नागरिकों और सरकार के बीच सेतु का कार्य करते हैं, बल्कि वे राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों को उठाने और उन्हें हल करने में भी सहायक होते हैं। भारतीय राजनीतिक दल मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित हैं: राष्ट्रीय दल और क्षेत्रीय दल। राष्ट्रीय दल जैसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय मुद्दों और व्यापक विचारधाराओं पर केंद्रित होते हैं, जबकि क्षेत्रीय दल क्षेत्रीय और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में योगदान देते हैं। हालांकि, भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली में कई चुनौतियाँ भी हैं। इनमें धनबल और बाहुबल का प्रभाव, वंशवाद, भ्रष्टाचार, और वैचारिक अस्थिरता प्रमुख हैं। इसके बावजूद, भारतीय लोकतंत्र ने समय-समय पर अपनी मजबूत नींव और जीवंतता को प्रदर्शित किया है। नागरिक जागरूकता, मीडिया, और स्वतंत्र चुनाव आयोग के योगदान ने भारतीय लोकतंत्र को सशक्त बनाया है। राजनीतिक दलों की पारदर्शिता, आंतरिक लोकतंत्र और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए सुधारों की आवश्यकता है, जिससे भारतीय लोकतंत्र और अधिक प्रगतिशील और समावेशी बन सके।

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How to Cite this Article:

प्रो. फिरत राम एंव प्रोफेसर प्यारेलाल आदिले. भारतीय लोकतंत्र और राजनीतिक दल. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(12):46-54,