Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 3 ISSUE.: 12(December 2024)
Author(s): डॉ. भेरूलाल चोरडिया
Abstract:
कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है। आधारभूत एवं अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कृषि fo”o के सभी राष्ट्रों के लिए अपरिहार्य है। कृषि समस्त उद्योगों की जननी, मानव जीवन की पोषक प्रगति का सूचक तथा सम्पन्नता का प्रतीक समझी जाती है। किन्तु भारतीय कृषि अपने अविकसित रूप के कारण न तो उसमें कार्यरत व्यक्तियों को उनके श्रम व विनियोजन का उचित प्रतिफल प्रदान करती हैं, ओर न ही वह हमारी खाद्यान्न सम्बन्धी आवश्यकताओं की भली भांति पूर्ति कर पाती हैं इसका कारण भारतीय कृषि की अपनी कुछ समस्याएँ है, जिनमें आधुनिक तकनीक का अभाव उत्तम एवं उन्नत बीजों का प्रयोग का अभाव, अपर्याप्त सिंचाई सुविधाएँ, कृषि यंत्रीकरण का अभाव, विद्युत का अभाव, रासायनिक उर्वरकों की कमी आदि ऐसी प्रमुख समस्याएँ है। जो भारतीय कृषि में आज भी विद्यमान है। देश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत सरकार वर्ष 2015-16 से लगातार कृषि एवं किसान कल्याण एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा को उच्च प्राथमिकता दे रही हैं। परिणामस्वरूप कोविड़-19 महामारी के दौरान भी कृषि की विकास दर में 3.4 फीसदी की वृद्धि होने से जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी 17.8 फीसदी से बढ़ कर 19.9 प्रतिशत हो गई हैं। दिलचस्प बात यह हैं कि इससे पहले 2003-04 में कुल जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी 20.77 प्रतिशत थी। fo”o व्यापार संगठन के व्यापार सांख्यिकी के अनुसार 2017 में fo”o कृषि व्यापार में भारत के कृषि निर्यात और आयात का हिस्सा क्रमषः 2.27 प्रतिशत और 1.90 प्रतिशत रहा।
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How to Cite this Article:
डॉ. भेरूलाल चोरडिया. ग्रामीण विकास में कृषि की भूमिका: एक विष्लेषणात्मक अध्ययन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(12):32-35,