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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 3 ISSUE.: 11(November 2024)

सामाजिक समरसता में गुरु घासीदास का योगदान


Author(s): प्रो. के. एल. टंडन एंव डॉ.अजय शुक्ला


Abstract:

गुरु घासीदास जी का जीवन और उनका योगदान भारतीय समाज में सामाजिक समरसता और समानता की स्थापना में अद्वितीय है। छत्तीसगढ़ में जन्मे गुरु घासीदास एक महान संत, समाज सुधारक और सत्य के अन्वेषक थे जिन्होंने समाज में फैले जाति-पाति, भेदभाव, अज्ञानता और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने 'सतनामी संप्रदाय' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य सभी लोगों को बिना किसी जातिगत भेदभाव के समान रूप से देखना और उनके बीच सामाजिक एकता को प्रोत्साहित करना था। उनके अनुसार, मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है, और ईश्वर की सच्ची उपासना में मानवमात्र के प्रति सम्मान, सत्य और प्रेम आवश्यक हैं। गुरु घासीदास ने 'सत्यनाम' का संदेश देते हुए मानव समाज को अंधविश्वास, पाखंड और अन्याय से दूर रहने का आह्वान किया। उनके विचारों का मुख्य उद्देश्य समाज में शांति, एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना था, ताकि एक ऐसे समाज की संरचना हो सके जिसमें सभी वर्गों को समान अवसर मिलें। उन्होंने अपने अनुयायियों को एक सच्चे और सरल जीवन जीने के लिए प्रेरित किया, जिसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। गुरु घासीदास के विचार और उनके आदर्श आज भी समाज में समानता और समरसता के प्रतीक माने जाते हैं। उनका संदेश समाज में उन वर्गों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणा है जो सदियों से सामाजिक असमानता और अन्याय का सामना कर रहे हैं। उनके योगदान के कारण, सामाजिक सुधार के क्षेत्र में गुरु घासीदास का नाम अत्यंत आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है।

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How to Cite this Article:

प्रो. के. एल. टंडन एंव डॉ.अजय शुक्ला. सामाजिक समरसता में गुरु घासीदास का योगदान. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(11):30-35,