Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 3 ISSUE.: 1(January 2024)
Author(s): डॉ. नवनीत कुमार सिंह
Abstract:
किसी भी देश के लिये निरक्षरता किसी अभिशाप से कम नहीं है। निरक्षर वह होता है जो पढ़ और लिख नहीं सकता है, अर्थात अक्षरों या शब्दों से अनभिज्ञ हो। निरक्षरता सिर्फ पढ़ने-लिखने में असमर्थता ही नहीं, बल्कि किसी विशेष ज्ञान या सूचना से परिचित न होने को भी दर्शा सकती है, जैसे ‘‘सांकेतिक रूप से निरक्षर”। सरकार द्वारा देश की निरक्षरता को दूर करने के लिये राष्ट्रीय प्रौढ़ शिक्षा योजना व राष्ट्रीय साक्षरता अभियान का एक विशाल कार्यक्रम तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य 15 से 35 आयु वर्ग के निरक्षर वयस्कों को शिक्षित करना है। कोठारी आयोग ने प्रौढ़ शिक्षा के सम्बन्ध में कहा था कि, “जो देश आर्थिक उन्नति, सामाजिक परिवर्तन एवं राष्ट्रीय सुरक्षा चाहता है, उसे अपने वयस्क नागरिकों को विकास कार्यक्रमों में कुशलता एवं बुद्धिमत्ता से भाग लेने की शिक्षा देनी चाहिए। यह बात भारत के लिए विशेष रूप से सत्य है, क्योंकि यहाँ के विशाल जनसमूहों को विद्यालयों में किसी प्रकार की शिक्षा प्राप्त नहीं हुई है और जिनको शिक्षा प्राप्त भी हुई है, वह विकास-कार्यक्रमों के लिए व्यर्थ है। जो कृषक, भूमि को जोतता है, उसे भूमि की बनावट का ज्ञान होना चाहिए। जो श्रमिक, मशीन को चलाता है, उसे मशीन के अंगों का ज्ञान होना चाहिए। कृषकों, श्रमिकों आदि को अपने कार्यों का ज्ञान नहीं है।” अतः उनको ज्ञान प्रदान करने के लिए प्रौढ़ शिक्षा की व्यवस्था की जानी आवश्यक है।
2020 में केन्द्र सरकार ने पूरे देश में शिक्षा में सुधार की दृष्टि से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और 2021-22 की बजट घोषणाओं के अनुरूप वयस्क शिक्षा के सभी पहलुओं को कवर करने के लिए वित्त वर्ष 2022-2027 की अवधि के लिए “नव भारत साक्षरता कार्यक्रम” को मंजूरी दी। इस कार्यक्रम को लागू करने का उद्देश्य भारत के जन-जन को 2030 तक शत प्रतिशत साक्षर बनाना है।
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How to Cite this Article:
डॉ. नवनीत कुमार सिंह. देश की शैक्षिक प्रगति में प्रौढ़ शिक्षा अभियान एवं राष्ट्रीय साक्षरता अभियान की भूमिकाः एक अध्ययन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2024; 3(1):91-96,