Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 2 ISSUE.: 7(July 2023)
Author(s): जाकिर हुसैन अब्बासी
Abstract:
भारत एक पुरुष प्रधान देश है । स्वतंत्रता प्राप्ति के 75 वर्ष पूर्ण हो जाने के बाद भी महिलाएं पूर्ण रूप से स्वतंत्र नहीं है । इन्हें वे अधिकार एवं स्वतंत्रता आज भी प्राप्त नहीं है जिसकी वे अधिकारिणी है । बालक को हर क्षेत्र में बालिका पर वरीयता दी जाती है । शिक्षा प्राप्ति के लिए भी बालिका के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है और ऐसा व्यवहार न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में बल्कि शहरी क्षेत्रों में देखने को मिलता है । ग्रामीण क्षेत्रों में तो परिवार व समाज की नकारात्मक मानसिकता के चलते बालिकाओं को शिक्षा दी ही नहीं जाती अगर दी भी जाती है तो कुछ कक्षाओं के बाद शिक्षा मध्य में ही बंद करवा दी जाती है । ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ संख्या में जो बालिकाएं माध्यमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने में सफल हो भी जाती हैं, उन्हें इसी नकारात्मक मानसिकता के चलते उच्च शिक्षा ग्रहण करने हेतु घर से बाहर नहीं भेजा जाता । इसके लिए धन का अभाव, बालक-बालिका में भेदभाव, विपरीत घरेलू परिस्थितियां, बालिकाओं की सुरक्षा की चिंता, परिवार व समाज का असहयोग जैसे कारण मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं ।
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How to Cite this Article:
जाकिर हुसैन अब्बासी. ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को उच्च शिक्षा हेतु बाहर नहीं भेजने के कारणों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2023; 2(7):40-42,