Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.

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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 2 ISSUE.: 12(December 2023)

खानदेश विभाग (महाराष्ट्र) में घन वन संवर्धन की मियावाकी पद्धति की उपयोगिता


Author(s): गणेश पाचकोरे और दत्ता ढाले


Abstract:

मियावाकी पद्धति (Miyawaki Method) वृक्षारोपण की एक जापानी विधि है । इसका प्रतिपादन प्रसिद्ध जापानी वनस्पतिशास्त्र (Botanist) अकीरा मियावाकी (Akira Miyawaki) ने किया था। यह कार्यविधि 1970 के दशक में विकसित की गई थी, जिसका मूल उद्देश्य भूमि के एक छोटे से टुकड़े के भीतर हरित आवरण को सघन बनाना था। घरों के आस – पास खाली पड़े स्थान (Backyards) को छोटे बगानों या जंगलों में बदला जा सकता है। इस पद्धति में पौधों को एक दूसरे से कम दूरी पर लगाया जाता है। पौधे सूर्य का प्रकाश प्राप्त कर ऊपर की ओर वृद्धि करते हैं, किंतु सघनता के कारण नीचे उगने वाले खरपतवार को प्रकाश नहीं मिल पाता है। यह पौधों की वृद्धि के लिए अच्छा है। इस पद्धति के अनुसार पौधों की तीन प्रजातियों की सूची तैयार की जाती है, जिनकी ऊंचाई अलग-अलग हो। इसका कारण यह है कि वे एक - दूसरे से कम से कम प्रतियोगिता करें। आमतौर पर जंगलों को पारंपरिक विधि से उगने में कम से कम 100 वर्ष का समय लगता है, जबकि मियावाकी पद्धति से उन्हें केवल 20 से 30 वर्षों में ही उगाया जा सकता है।

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How to Cite this Article:

गणेश पाचकोरे और दत्ता ढाले. खानदेश विभाग (महाराष्ट्र) में घन वन संवर्धन की मियावाकी पद्धति की उपयोगिता. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2023; 2(12):06-09,