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INTERNATIONAL JOURNAL OF
ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION

Impact factor (QJIF): 8.4  E-ISSN: 2583-6528


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INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION


VOL.: 2 ISSUE.: 10(October 2023)

शिक्षा का प्रमुख कारक भाषाः पं0 जवाहरलाल नेहरू एक दृष्टिकोण


Author(s): डॉ. नवनीत कुमार सिंह


Abstract:

बीसवीं शताब्दी के पूर्वाद्ध में अनेक ऐसे लोग राजनीति के क्षेत्र में आये, जो मात्र राजनीतिज्ञ ही नहीं थे वरन् भाषा के धनी तथा साहित्य के गहन अध्येता ही थे। उस काल के विभिन्न विचारक इस परम्परा के प्रखर प्रतीक थे। उन्होंने अंग्रेजी के प्रभाव को कम करने हेतु मातृभाषा में शिक्षा देने की वकालत की। परन्तु लाला लाजपतराय व पं0 जवाहरलाल नेहरू ने मातृभाषा के साथ अंग्रेजी भाषा की भी वकालत की। लाला लाजपतराय जी का विचार था कि, ‘‘यूरोपीय भाषाओं, साहित्य एवं विद्वानों के अध्ययन को भारत में प्रोत्साहन न देना मूर्खता व पागलपन होगा। अभी उनका यथेष्ट ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ है। लाला लाजपत राय ने अपनी पुस्तक ‘द प्राब्लम आॅफ नेशनल एजूकेशनल इन इण्डिया‘ में शिक्षा में माध्यम के प्रश्न पर गम्भीरता से विचार किया। उनके अनुसार जनता की शिक्षा जनता की भाषा मंे हो। महात्मा गाँधी के कथनानुसार, “जवाहरलाल मेरा उŸाराधिकारी होगा। उसका कहना है कि वो मेरी जबान नहीं समझता और वह एक ऐसी भाषा बोलता है, जो मेरे लिए विदेशी है। यह बात ठीक भी हो सकती है, लेकिन दो दिलों के मिलाप में भाषा बाधा नहीं बन सकती। मैैं इतना जानता हूँ कि मैं नहीं रहूँगा, तो वह मेरी भाषा बोलेगा।” स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री का गौरव हासिल करने वाले पं0 नेहरू ने भाषा को परिभाषित करते हुए लोकसभा में कहाः ‘‘भाषा जनता के विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम है। विचार, विश्व में सबसे महत्वपूर्ण वस्तु है, क्योंकि प्रत्येक वस्तु विचारों का परिणाम है। परन्तु विचारों को शक्तिशाली शब्दों का रूप लेना चाहिए। अधिकांश महत्वपूर्ण विचार प्रभावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किये जाते हैं।’’ हिन्दी के महत्व को स्वीकार करते हुए पं0 जवाहरलाल नेहरू भारत में औद्योगीकरण तथा तकनीकी विकास हेतु अंग्रेजी भाषा के समर्थक थे। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा- ‘‘आधुनिक समय में अंग्रेजी अधिक व्यापक व विश्व की महत्वपूर्ण भाषा है तथा विश्व की लगभग दो तिहाई वैज्ञानिक व तकनीकी पुस्तकें अंग्रेजी माध्मय में है।’’ पं0 नेहरू हिन्दी के विरोधी नहीं थे और न ही अंग्रेजी के पक्षधर थे। किन्तु वे हिन्दी अतिवादियों के विरूद्ध जनता को सचेत करना चाहते थे, जो एकता के नाम पर हिन्दी का नारा बुलन्द करके दक्षिण के उन क्षेत्रों में हिन्दी को लादना चाहते थे जो उनके विरोधी थे। उनका सुझाव था कि भारत में प्रत्येक छात्र को स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय भाषा की जानकारी मिलनी चाहिए, इसलिए उन्होंने त्रिभाषा-सूत्र का समर्थन किया।

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How to Cite this Article:

डॉ. नवनीत कुमार सिंह. शिक्षा का प्रमुख कारक भाषाः पं0 जवाहरलाल नेहरू एक दृष्टिकोण. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2023; 2(10):53-57,